Akelapan shayari in Hindi 🚶🏾 अकेलापन शायरी (2023)

Akelapan shayari in hindi: अकेलापन एक ऐसी भावना है जो हर किसी को कभी न कभी जरूर अनुभव होती है। आज के भागदौड़ भरे जीवन में मनुष्य अक्सर अकेलापन का अनुभव करने लगा है। जब कोई व्यक्ति अपने आपको दूसरों से कटा हुआ महसूस करता है, तो उसे अकेलापन की अनुभूति होती है।

आजकल के मोबाइल और इंटरनेट के युग में भी लोग अकेलेपन का अहसास कर रहे हैं। सोशल मीडिया के बावजूद भी दिल की एकाकी बढ़ती ही जा रही है। व्यस्त जीवनशैली के कारण लोगों के बीच दूरियाँ बढ़ रही हैं। इसलिए आज हम आपके लिये अकेलापन शायरी लाये हैं Akelapan shayari in hindi अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे

akelapan shayari

बड़े शौक से छोड़ा था
उसने मुझे अपने हाल पर
मगर इन आंखों में शायद
अब भी तेरा इंतजार बाकी है.!!

akelapan shayari in hindi

जब से मुझे प्यार
में मिली बेवफाई है
तब से मेरी जिंदगी में
दर्द और तन्हाई है..!

sad akelapan shayari

यह अकेलापन का
सफर भी कट जाएगा
जिस दिन गम का
बादल हट जाएगा..!

akelapan shayari hindi

तेरी आंखों में आंसू ना देख सका
मैं सारी रात चैन से ना सो सका..!

zindagi akelapan shayari

बड़े ही हसीन अंदाज से
उसने दिल पर वार किया
पहले प्यार किया फिर
अकेलापन देकर दरकिनार किया..!

akelapan shayari in hindi 2 lines

मै तेरे इंकार की वजह जान गया
तेरी खामोशियो को मैं पहचान गया..!

hindi akelapan shayari

महफ़िल से दूर मैं अकेला हो गया
सूना सूना मेरे लिए हर मेला हो गया !!

sad akelapan shayari in hindi

ख्वाब बोया है मैंने और
अकेला-पन काटा है
इस प्यार – मोहब्बत में यारो
घाटा ही घाटा है !!

khamoshi akelapan shayari in hindi

हमारे इस अकेलेपन ने हमें
जीना सीखा दिया
बची हमारी ये हँसीं तो उसे हमनें
पहले ही भुला दिया !!

dard akelapan shayari in hindi

मेरी तन्हाई देखकर
उदासियां भी रो पड़ी
जब मुस्कुराने की कोशिश की
तो मेरी गुस्ताखियां रो पड़ी !!

तेरे जाने के बाद मैंने कितनों को
यु आज़माया हैं
मगर कोई भी मेरे इस अकेलेपन को
दूर नहीं कर पाया हैं !!

तुम्हारे करीब हम कुछ
इस तरह आते गये
तन्हाइयों के और नजदीक जाते गये !!

ये इश्क जादू टोना है
अगर दिल लगाया है
तो तन्हा भी होना है !!

अकेले मर जाना ए-दोस्त
पर किसी पे भरोसा मत करना !

प्यार में इंसान तन्हाइयों का शिकार हो जाता है
क्योंकि प्यार का रास्ता ही तन्हाइयों से होकर जाता है !!

बना-कर रख ले कैदी मुझे तू
अपनी चाहत का
बिछड़ के तुमसे जीना अब मुझे
गवारा नहीं होता !!

अकेलापन एक सज़ा सी है
लेकिन इसमें जीने में भी अपना
अलग ही मज़ा है !!

दिल्लगी में दिल लगा बैठे
सारा चैन-ओ-सुकून गंवा बैठे
बहुत देख ली महफिलें इश्क की
अब तन्हाइयों के आगोश में आ बैठे !!

रात ये मुझसेे बहुत
मोहब्बत करती है
सब सो जाएं तब अकेले में
बात करती है !

तन्हाइयों से मेरी पहचान लगती है
मुझे महफिलें भी वीरान लगती है !!

ख़ुद पर मुझे यक़ीन तो है इतना
कि रोएगा वो सख़्श
मुझे फिर से पाने के लिए !!

किसी को अहसास दिलाने के लिए
बिछड़ा न करो
वरना वक़्त उसे आपके बगैर ही
जिना सीखा देगा !!

कोई आया नही कितना बुलाया हमने
उम्र भर एक जमाने को बहुत जगाया हमने !!

कैसे मान लिया तुम अकेले हो
दूर हूँ तुमसे यह मजबूरी है मेरी
पुकारो अगर शिद्दत से मुझको
चला आऊँगा मैं राह में तेरी !!

जनाब जिसको हम जितनी ज्यादा
अहमियत देते है ना
एक समय ऐसा भी आता है
जब वही इंसान आपको अकेला
छोड़ कर चला जाता है !!

कौन कहता है जनाब ये
अकेलापन खलता है
जब जिंदगी की समझ हो जाए तो
खुद का साथ भी भाता है !!

झूठी मुस्कान मुस्कुराते
पूरी उम्र कट जाएगी
महफ़िल की आड़ में
तन्हाई कहीं छुप जाएगी !!

मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता !!

सुनो तुम्हारे जाने के बाद हम कभी
अकेलापन महसूस ही नहीं कर पायें
क्या करते कमबख्त तनहाईयों को
मोहब्बत जो हो गई है हमसे !!

आज जो इस अकेलेपन का
एहसास हुआ खुद को
तो समभाल नहीं पाया
अपने इन आसुओं को !!

वो अकेला चाँद है आसमा मे
जो तेरी तरह है हजारो मे
मगर वो चाँद अकेला है
मेरी तरह उन सितारो मे !!

ख़्वाब की तरह बिखर जाने को
जी चाहता है
ऐसी तन्हाई कि मर जाने को
जी चाहता है !!

जनाब कैसे मुकम्मल हो उस इश्क़ की दास्तां
जिसकी फितरत में ही अकेलापन होता है !!

इंसान सिर्फ एक कारण से
अकेला पड़ जाता हैं
जब उसके अपने ही उसे
गलत समझने लगते हैं !!

अकेलापन क्या होता है
यह कोई ताजमहल से पूंछे
देखने के लिए पूरी दुनिया आती हैं
मगर रहता कोई नहीं है !!

किस से कहु अपनी तन्हाई का आलम
लोग चेहरे के हसी देख बहुत खुश समझते हैं !!

तकलीफ तो जिंदगी देती हैं मौत को तो लोग युही
बदनाम करते हैं !!

अकेलापन कभी कभी खुद पर
इतना हावी हो जाता है की
वो हमसे कुछ ऐसा करवा देता है कि
जो सोच से भी परे होता है !!

मेरी तन्हाई को मेरा शौक न समझना
बहुत प्यार से दिया है ये तोहफा किसी ने !!

अब सहारे की कोई बात मत कर
ऐ जालिम जिंदगी
मेरा अकेलापन ही काफी है
मुझे सहारा देने के लिए !!

अजीब है मेरा अकेलापन
ना खुश हूँ ना उदास हूँ
बस खाली हूँ और खामोश हूँ !!

कोसते रहते हैं अपनी जिंदगी को उम्रभर
भीड़ में हंसते हैं मगर तन्हाई में रोया करते हैं !!

अब तो याद भी उसकी आती नही
कितनी तनहा हो गई तन्हाईयाँ !!

दोस्तों हर किसी की एक कहानी होती है
किसी की पूरी तो किसी की अधूरी होती है !!

शाम-ए तन्हाई में इजाफा बेचैनी
एक तेरा ख्याल न जाना
एक दूसरा तेरा जवाब न आना !!

कभी सोचा नहीं था वो भी मुझे तनहा कर जाएगी
जो परेशान देख कर अक्सर कहती थी मैं हूँ ना !!

मेरा हाल देखकर मोहब्बत भी शर्मिंदा हैं
की ये शख्स सब कुछ हार गया फिर भी जिन्दा हैं !!

इस तरह हम सुकून को महफूज़ कर लेते हैं
जब भी तन्हा होते हैं तुम्हें महसूस कर लेते हैं !!

अब मुझे रास आ गया है अकेलापन
अब आप अपने वक्त का अचार डालिए !!

कभी-कभी बहुत सी बातें करनी होती है
मगर कोई सुनने वाला नहीं होता !!

अपने साए से चौंक जाते हैं
उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा !!

हालात सिखाते है बाते सूनना और सहना
वरना हर शक्स फितरत से बादशाह ही होता है !!

रिश्तों के बाजार में आजकल
वो लोग हमेशा अकेले पाए जाते हैं
जो दिल और जुबान के सच्चे होते हैं !!

भरोसा रखना मेरी वफाओं पर
दिल में बसा कर हम किसी को भूलते नहीं !!

जो इंसान हमेशा सच का साथ देता है
वह हमेशा अकेला ही होता है

किसी ने पूछा अगर कोई अपना
छोड़कर चला जाए तो क्या करोगे
अपना कभी छोड़कर नहीं जाता और
जो जाए वह अपना नहीं होता !!

इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद !!

अब नींद से कहो हम से
सुलह कर ले फ़राज़
वो दौर चला गया जिसके लिए
हम जागा करते थे !!

जब भी तन्हाई में उनके बगैर
जीने की बात आयी
उनसे हुई हर एक मुलाकात
मेरी यादों में दौड आई !!

बस एक भूलने का हुनर ही
तो नहीं आता
वरना भूलना तो हम भी बहुत
कुछ चाहते हैं !!

कई बार वो सोचकर
दिल मेरा रो देता है कि
मुझे ऐसा क्या पाना था जो मैंने
खुद को भी खो दिया !

क्या कहें जनाब कि अकेलापन क्यों इतना भाता है,
खुद से बातों में अक्सर यू ही वक्त गुज़र जाता है।

सुन अकेला रहना और अकेलेपन में रहना,
वैसा ही होता है जैसे की मुस्कुराना और गम में रहना।

मुझे मेरा अकेलापन ही कुछ ज्यादा भाता है,
इन खोखले बनावटी रिश्तों के बीच दिल घबराता है।

यूँ ही बेवजह न मुझे वो खोजता होगा,
शायद उसे भी ये अकेलापन नोचता होगा।

इस अकेलेपन ने एक बात तो सीखा दी हैं,
दिखावे की नज़दीकीयां से तो हकीक़त की दूरिया अच्छी हैं।

मेरे अकेलेपन ने भी क्या खूब साथ निभाया इस ज़िन्दगी में,
कि अब तो आलम ये है कि हम दीवारों से भी बातें करते हैं।

जनाब जिंदगी में आकेलेपन और एहसासों के बड़ा काम होता हैं,
जो दूसरे के गमों को अपनाता हैं वही इंसान होता हैं।

मेरा नसीब अच्छा था जो तेरा दीदार हो गया,
पहले मैं अकेली थी और अब अकेलेपन की शिकार हो गयी।

अकेला हूँ और तन्हा भी पर गलत नही हूँ मैं,
बस तुम पर अपना एकाधिकार समझ बैठा हूँ मैं।

लिखने का कोई शौक नहीं मुझे,
बस खुद को यु उलझाए रखा है इसमें,
क्योंकि इस अकेलेपन में तो बस सिर्फ उसकी याद आती हैं।

वो दूर का सितारा दूर हो कर भी अब अपना सा लगता है,
क्यूंकि जनाब मेरे इस अकेलेपन को
वो अकेलापन मेहसूस ही नहीं होने देता है।

ये अकेलापन सभी को काटता है,
पर न कोई इसको बाँटता है,
अगर जो कोई चाहे इसको बाँटना।
बुरा भला कह कर सब कोई डाँटता है।

भीड़ में ये अकेलापन मुझसे मिलने जब आया,
क्या है ये अकेलापन मुझे समझ में तब आया।

खुशियों को बाँटता हुआ एक मेला हूँ मैं,
सच कहूँ तो अपनों में भी बहुत अकेला हूँ मैं।

जनाब इतने मतलबी भी मत बन जाओ,
कि तुम्हें अब दूसरों का अकेलापन भी नजर ना आ पाए,
और इतना अच्छा भी मत बन जाओ,
कि तुम्हें दूसरों की बुराई भी नजर ना आ पाए।

सुबह से रात और रात से यु ही सुबह हो जाती है,
ये अकेलापन खत्म होने का नाम ही नहीं लेता है।

अकेलेपन से दिल जाने क्यूँ घबरा रहा है,
मुझें वो तेरी बातें फिर से याद दिला रहा है।

मैं अकेलेपन में खुद को तुमसे छिपाते जा रहे हूँ,
अपनी ही नजरों में खुद को गिराते जा रहा हूँ।

सुन क्यूं तू मुझे हर मोड़ पर मिल जाती है,
थोड़ी दूर साथ चल कर फिर तू अकेला छोड़ जाती है।

क्या कहें कि अकेलापन क्यों मुझे इतना भाता है,
खुद से बातों में अक्सर मेरा वक्त गुज़र जाता है

अकेलेपन से कोई बैर नही है मुझे,
डरता हूँ की कोई याद ना आ जाये मुझे।

जो सबसे अलग होते है उनके साथ कोई नहीं भी होता है,
वैसे भी मेरे साथ कोई होगा इसकी कोई उम्मीद भी नहीं है।

ये अकेलापन क्या होता है,
ये उस पेड़ में बचे आखिरी पत्ते से पूछो जारा,
जिसने बस पतझड़ के आने की उम्मीद लगा रखी है।

ख़ुद में ख़ुद का वजूद ढूंढता हूँ मैं,
भीड़ में भी तन्हा समझता हूँ खुद को मैं।
बस एक तेरी कमी कुछ ऐसी है ज़िन्दगी में,
अब सब कुछ पाकर भी बदनसीब समझता हूँ खुद को मैं ।

हमारे जैसे लोग कभी किसी से रूठा नही करते है,
क्योंकि हमें पता होता है की हमे मनाने वाला
कोई नहीं है इस ज़माने में।

आज जो अकेलेपन का एहसास हुआ है खुद को,
तो बस समहाल नहीं पाया अपने आसुओं को।

कैसे बताऊं क्यूँ तेरी ये यादें यु चली आती हैं,
कैसे बताऊं क्यूँ मुझे ये आके इतना रूला जाती हैं।

वो जो दूर का सितारा दूर हो कर भी अपना सा लगता है,
क्यूंकि वो मेरे इस अकेलेपन को
अकेलापन मेहसूस ही नहीं होने देता है।

जनाब खुद से खुद की पहचान करा देता है ये अकेलापन,
लोगो के बीच आपकी एक
अलग सी पहचान बना देता है ये अकेलापन।

बढ़ती नजदीकियों को अक्सर जुदाई में बदलते देखा है,
आज सोचा अपने अकेलेपन से नजदीकी बढ़ा के तो देखूं।

किसी के दर्द में वो भी अपने ग़मों की झलक पाता है,
बूढ़ा, लाचार, इंसान अक्सर अकेला ही रह जाता है।

अब इस भीड़ में जीना दुश्वार सा लगता है,
अकेलापन ही अब जैसे संसार सा लगता है,
औरों से मिली मोहब्बत में वो मज़ा कहां जनाब,
अब तो ख़ुद में ही खो जाना ही प्यार सा लगता है।

इस अकेलेपन में कभी खुद से भी बात कर लिया करो,
इस अधूरेपन को कभी खुद से भी पूरा कर लिया करो,
इस मतलबी सी दुनिया में कभी खुद से भी प्यार कर लिया करो,
गैरों से अच्छा तो दो-चार गुफ़्तगू कभी खुद से भी कर लिया करो।

कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी,
हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है।

चुभते हुए ख्वाबों से कह दो अब आया ना करे, 
हम तन्हा तसल्ली से रहते है बेकार उलझाया ना करे।

अकेलापन अब हमे सताता है,
दिन मे सपने ओर रातो को जागता है।

कल भी हम तेरे थे, आज भी हम तेरे है,
बस फर्क इतना है,
पहले अपनापन था, अब अकेलापन है।

कुछ कर गुजरने की चाह में कहाँ-कहाँ से गुजरे,
अकेले ही नजर आये हम जहाँ-जहाँ से गुजरे।

जिंदगी की राहों पर कभी यूँ भी होता है,
जब इंसान खुद को पढ़ता है अकेले में।

एक उम्र है जो तेरे बगैर गुजारनी है,
और एक लम्हा भी तेरे बगैर गुजरता नहीं।

अजीब सा है मेरा अकेलापन,
अब ना किसी के आने की खुशी है

आज परछाई से पूछ ही लिया मैंने,
क्यों चलते हो साथ मेरे,

शौक नही था हमें भी अकेलेपन का
ये भी सच्ची मुहब्बत की सजा थी

अकेले रोना भी क्या खूब कारीगरी है,
सवाल भी खुद के होते है और जवाब भी खुद के। 

मेरी जंग थी वक्त के साथ,
फिर वक्त ने ऐसी चाल चली,
मैं अकेला होता गया। 

मैं कभी अकेला महसूस नहीं करता
क्योंकि मेरा अकेलापन हमेशा मेरे साथ है।

कभी कभी चेहरे की मुस्कान के पीछे
अकेलेपन का दर्द छुपा होता है।

एक दौर था जब मेरे भी
अपने हुआ करते थे,

तुम क्या जानो हम
अपने आपमें कितने अकेले है,

किसी ने दिल जीत लिया, किसी ने दिल हारा था,

वो तुम्हारे नज़रिए से अकेलापन हो सकता है
पर मेरे नज़रिए से देखो वो मेरा सुकून है।

बड़े शौक से छोड़ा था
उसने मुझे अपने हाल पर
मगर इन आंखों में शायद
अब भी तेरा इंतजार बाकी है.!!

मेरा अकेलापन ही मेरा साथी हैं,
मुझे किसी और की ज़रूरत नहीं,
क्या करे किसी से रिश्ता जोड़ कर,
जब की मुझे जिंदगी में और दर्द की ज़रूरत नहीं।

अब इंतज़ार की आदत सी हो गई है
खामोशी एक हालत सी हो गई है
ना शिकवा ना शिकायत है किसी से
क्यूंकी अब अकेलेपन से मोहब्बत सी हो गई है।

हो सकता है हमने आपको कभी रुला दिया,
आपने तो दुनिया के कहने पे हमें भुला दिया,
हम तो वैसे भी अकेले थे इस दुनिया में,
क्या हुआ अगर आपने एहसास दिला दिया…

धोखे से डरते हैं इसीलिए
आज भी अकेले रहते हैं।

उदासियों का ये मौसम बदल भी सकता था
वो चाहता तो मेरे साथ चल भी सकता था।

जीवन में अकेले रहना
इतना आसान भी नहीं।

अगर मजबूत बनना चाहते
हो तो अकेले लड़ना सीखो।

ये अकेलापन मुझे भाने लगा अब,
करीब जाना मुझे चौकाने लगा अब।

पास आकर सभी दूर चले जाते है,
अकेले थे हम अकेले ही रह जाते है!
इस दिल का दर्द दिखाये किसे?
मल्हम लगाने वाले ही जख्म दे जाते है!!

मज़बूरी में जब कोई जुदा होता है,
ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है,
देकर वो आपकी आँखों में आँसू,
अकेले में वो आपसे ज्यादा रोता है।

हमेशा सही का साथ दो, भले
ही आप अकेले ही क्यों न हों।

हालात ने तोड़ दिया हमें कच्चे धागे की तरह…
वरना हमारे वादे भी कभी ज़ंजीर हुआ करते थे

थक गया हूँ मैं अकेलेपन
से प्यार करते करते।

हम तो बस अकेले चुपचाप रहते हैं
लेकिन लोगों को हम घमंडी लगते हैं।

अकेलापन से बचने के लिए हमें अपने परिवार, दोस्तों और समाज से जुड़े रहना चाहिए। सकारात्मक रहने और नए लोगों से मिलने से भी अकेलापन दूर हो सकता है।

एकाकीपन जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। हमें एक-दूसरे का साथ देना चाहिए और दूसरों के अकेलापन को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

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